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चेतना जागृति

संजय शर्मा 'अहसास' नक्षत्र 2016 .. ......एक बहुत ही शानदार प्रदर्शनी रही ! 

गुरुजी उच्च श्रेणी के सन्त हैं  जिनका उपस्थिति में दिव्यता, आध्यत्मिकता का अनुभव होता है  ।  ये सच्चे परमहंस हैं क्योंकि इन्होने ब्रह्माण्ड के कई रहस्यों को सुलझा लिया है परन्तु आज भी अहंकार विहीन हैं ।  गुरु श्री संजय शर्मा, कभी भी अपने पूर्ण ज्ञानोदीप्त होने का प्रबोध का प्रचार नहीं करते वरन विख्यापन प्रकाशन से दूर रहते हैं  ।  यही कारण है कि वे अपने मनोगत गूढ़ ज्ञान का सार्वजनिक रुप से प्रदर्शन नहीं करते हैं ।

सितारे उनके कानेां में बुदबुदाते हैं ,  वे जन्म - कुण्डली की शत् प्रतिशत सटीक व्याख्या करते है ।   प्रश्नकर्ता की मौलिकता में संशय होने पर वे अपना परामर्श नहीं देते हैं । 

ब्रह्मारन्द्र चक्र ब्तवूद ब्ींातं पौरुष का प्रतीक है । और मूलाधार चक्र स्त्री उर्जा का ।   इन दोनो को संतुलन ही शान्ति का अनुभव कराता है  ।  गुरुजी  मे ये दोनो शक्तियॉ पूर्णतयः संतुलित रुप में विद्यमान हैं  ।  जैसा कि वे कहते हैं कि अपने में विद्यमान दोनों शक्तियॉे का आदर करो, समान अधिकार  प्रदान करो दोनों में संतुलन स्थापित करो तभी तुम्हे शारीरिक शुचिता, भावनात्मक सम्बल, उच्चतर चेतना और सौभाग्य प्राप्त होगा ।  दोनों शक्तियों के संतुलन से ही कुण्डलानी जागृत होने पर आप सदैव अद्भूत आनन्द में रहेंगे ।  अपनी अव्यक्त प्रतिभा को पहचान सकेंगे ।  पूर्ण अखण्डता का अनुभव करेंगे ।  आत्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे । 

मैं वही हॅू जो मुझे मेरे बाबा ने बनाया ।   बाबा मेरे भगवान है, मित्र हैं, गुरु और मार्ग दर्शक हैं ।  मुझे उन पर पूर्ण विश्वास है गुरु श्री प्रायः यह बात  कहते हैं 

गुरु श्री को आध्यत्मिकता अपने पिता जी से उत्तराधिकार में मिली है ।  वे भी 28 वर्षो तक शिव मन्दिर प्रशान्त विहार के प्रधान रहे ।    हिन्दुत्व से ओत प्रोत, धार्मिक संस्कारी से मुक्त वातावरण में जन्म,  पले बढे़ गुरु श्री बाल्यकाल से ही मन्दिर  में हाने वालेा कार्यक्रमों में भाग लेते थे ।  अपनी धर्मपारायाण, धर्म पत्नी श्रीमति रमा के सहयोग से गुरुजी ने मन्दिर को नवीन ऊंचाइयों तक पहुॅचा दिया ।

इन्हाने ने मन्दिर का नव निर्माण करवाया ।  मन्दिर के प्रॉगण में निर्मित नव ग्रह मन्दिर का निर्माण ।  सिन्दूरी गणेश जी, पंचमुखी हनुमान जी, काली माता और शनि  के स्वरुप मन्दिर की शोभा और शक्ति की बढ़ाते है। 

सभी धार्मिक कार्यक्रम तथा जन्माष्टमी, महा शिव रात्रि और गुरु पूर्णिमा आदि मन्दिर   में मनाये जाते हैं   र्कीतन, भजन संध्या, माता की चौकी और हरे रामा हरे कृष्णा जाप समय समय पर आयोजित होते रहते है।  प्रत्येक बृहस्पतिवार को प्रातः पूर्ण विधि विधान से बाबा को स्थान करवाया जाता है  ।  ग्ुारु श्री स्वयं बाबा को स्नान करवाते है।    वस्त्राभूषण पुष्पों से सजाते हैं  ।  सांयकाल ‘साई भजन संध्या’ का आयोजन किया जाता हैं  जिसमें विभिन्न कलाकार बाबा की स्तुति व प्रशंसा में भक्ति रस से ओत-प्रोत भजनों द्वारा बाबा की अराधना करते है ।  तदुपरान्त ‘लंगर’ का आयोजन किया जाता है ।

इन सबके अतिरिक्त गुरु जी समय समय पर सामूहिक कार्यक्रम जैसे विष्णु सहस्त्रनाम यज्ञ, सत्यनारायण पूजा व भागवद् कथा आदि का आयोजन, मन्दिर प्रांगण में करते रहते हैं 

अपने हर रुप में गुरु जी सम्पूर्ण हैं ।