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सुकून

संजय शर्मा 'अहसास' नक्षत्र 2016 .. ......एक बहुत ही शानदार प्रदर्शनी रही ! 

ध्यान...... मुक्त करने की कला है । अपने जीवन में हम हर पल कुछ न कुछ करते रहते हैं । जैसे खाना - सोना, यात्रा, घर-दफतर के कार्य आदि । वास्तव में कुछ न कुछ करने के लिये हमें प्रयास करने पड़ते हैं । हम कार्यरत रहने के इतने आदि हो गये है कि कार्य-विहीन होना ही भूल गये हैं ।

जब आप ध्यान करना आरम्भ करेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि आपका मस्तिष्क कितना अनियंत्रित है । मैं ये जानकर आश्चर्यचकित हो गया कि मेरा मस्तिषक सब ओर फैला है । कुछ समय बाद मुझे समझ सआया कि मैं कितनी पीड़ा वहन कर रहा था ।

अधिकॉश चिकित्सक आज कल रक्तचाप, श्वास रोग, अनिद्रा रोग, तनाव जैसी व्यद्यियों के उपचार हेतू ध्यान योग का परामर्श देते हैं । घ्यान व्यक्ति के शारीरिक व भावनात्मक संतुसलन के लिये सरल और सुरिक्षत उपाय है ।

ध्यान योग का अभ्यास पूर्व व पश्चिम के सभी देशों में किया जा रहा है । इसके लिये आपको साधु सन्यासी बनने, जंगलो या आश्रमों में रहने की आवश्यकता नहीं । आप अपने दैनिक क्रिया - कलापों को करते हुये सभी सम्बन्धों का निर्वाह करते हुये भी घ्यान कर सकते हैं । ये एक आन्तरिक क्रिया है आन्तरिक अभ्यास है जिसे करने के लिये किसी विशेष धर्म, पोशाक या विशिष्ट जीवन की आवश्यकता नहीं है ।

गुरु के अनुभवी मार्ग दर्शन में ध्यान ‘ क्रिया सीखना और अभ्यास करना वैसा ही जैसे ‘मॉ की गोद’ में बैठना । वे उतना ही अभ्यास, वैसी ही साधना करवाते है जैसी साघ की क्षमता होती है ।